भारतीय राजनीती में पिछले कुछ वर्षो के अलावा यदि देखा जाये तो चुनाव में विकास का मुद्दा था ही नहीं | विकास पिछले कुछ वर्षो में ही एक मुद्दा बना है भारतीय चुनावो में | स्वतंत्रता के पश्चात् जिस राजनैतिक पार्टी का शाशन रहा है उसने कभी विकास के बारे में तब तक नहीं सोचा की जब तक शासन में उसका कोई प्रतिद्वंदी नहीं आ गया | जब वह पार्टी सत्ता से दूर हुई तो विकास की बात कर रही है | अब चुनावो में घोषणा पत्रों का अवलोकन करे तो यही प्रतीत होता है की सभी पार्टिया विकास करना चाहिती है लेकिन प्रत्येक पार्टी के विकास के मापदंड अलग अलग है | और मानव स्वाभाव भी यही है की प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता अलग अलग हो सकती और इसी के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के लिए विकास का मापदंड भी अलग अलग ही होगा |
वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो विकास की संरचना में तीन तरह के देश है
विकसित , विकासशील और अविकसित अब प्रश्न ये है की जब प्रत्येक व्यक्ति के विकास का मापदंड अलग है तो किसी देश अथवा व्यक्ति को विकसित , विकासशील और अविकसित की श्रेणी में रखने की अवधारणा कैसे निश्चित की जा सकती है | और अगर सभी से पूछा भी जाये की विकास का मापदंड क्या होना चाहिए तो जवाब अलग अलग ही आयेगा |
नटवर दान गाडण
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