बुधवार, 6 जनवरी 2016

पहली कविता



तुमने जो थे गीत सुनाये
रात हमारे स्वप्न में आये
पाया हमने जैसा भी हो क्षण भर का सम्मान
गाओ पुनः पुराना गान १
है व्याकुल सुन गान तुम्हारे
सुन ण सके जो कान हमारे
एक बार फिर सहज रूप से करदो तुम आसान
गाओ पुनः पुराना गान २
जो मैंने तब नहीं सुने थेजो
जो जो हमने स्वप्न बुने थे
उन सपनो का अपने मन से मत करना अवसान
गाओ पुनः पुराना गान ३
गाओ फिर तुम वही तराना
जो रह गया था शेष सुनना
ना बाधा ना कोई रुकावट ना कोई व्यवधान
गाओ पुनः पुराना गान ४
ज्ञात है हमको आ ना सकोगे
हमको तुम फिर पा ना सकोगे
किन्तु फिर भी करदो पुरे एक बार अरमान
गाओ पुनः पुराना गान 
जीवन की बस एक ही आशा
तुमको पाने की अभिलाषा
एक बार फिर हो जाये हम दोनों ही नादान
गाओ पुनः पुराना गान 
जैसा हमने तुमको पा कर
तुमको अपने पास बुला कर
करना चाहू एक बार फिर वैसा ही अभिमान
गाओ पुनः पुराना गान 
छोटी सी प्रेम कथा से
मेरी तुम इस विरह व्यथा से
मन में धर लो एक बार टो मत न बनो अंजान
गाओ पुनः पुराना गान ८
मेरा जीवन तुम्हे समर्पित
पल पल मेरा तुमको अर्पित
ऐसे ही कुछ शब्दों का तुम फिर से करो बखान
गाओ पुनः पुराना गान 

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