गुरुवार, 8 जुलाई 2021

गरीबी का स्वागत

लॉक डाउन के इस काल में लोग अब धीरे धीरे रमने लग गए है | ये समाजवाद की परिभाषा को परिभाषित करने का काल है | परिभाषित करने का अर्थ समाजवाद को सही ठहराना नहीं है अपितु इससे भयभीत होने से है | क्यों की जिस प्रकार वर्त्तमान स्थति में लोग ढल रहे है उससे ये लगता है की समाज इसके बाद की स्थति की कल्पना नहीं करना चाहते | भविष्य की कल्पना और दूरदर्शिता में ज्यादा अंतर नहीं है |लेकिन इसे केवल भविष्य की कल्पना मात्र माने  तो भी हमें तैयार रहना चाहिए उस परिस्थिति से जिसे हम समाजवाद के परिणाम के नाम से परिभाषित करेंगे | 

समाजवाद का परिणाम केवल गरीबी ही है | चूँकि ये दूरगामी परिणाम है लेकिन सबको ये भी पता होना चाहिए की अंतिम परिणाम सबसे दूर ही होता है | इसलिए दूरगामी परिणाम को सदैव गंभीरता से लेना चाहिए | परिणाम की बात करे तो लॉक डाउन के बाद देश को गरीबी , बेरोजगारी , आर्थिक संकट जैसी परिस्थितियों को झेलना पद सकता है | 

समस्या को टाला नही जा सकता लेकिन उससे लड़ा जा  सकता है | कोरोनो काल में जितना जरुरी लॉक डाउन  है उससे कही ज्यादा लॉक डाउन का पालन करना है | क्यों की जब तब इसकी पलना नहीं होगी तब तक लॉक डाउन सफल नहीं होगा और जब तक लॉक डाउन सफल नहीं होगा तब तक इसे हटाना संभव भी नहीं | यहाँ एक बात समझने की है की जितना लॉक डाउन लम्बा होगा उसके परिणाम उतने ही भयावह होंगे | इसलिए लॉक डाउन की पलना बहुत जरुरी है | 

जिस प्रकार लॉक डाउन एक सत्य है उसी प्रकार उसके परिणाम भी एक सत्य है | इसलिए इसके परिणाम के लिए भी हमें मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए | 

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

विकास

भारतीय राजनीती में पिछले कुछ वर्षो के अलावा यदि देखा जाये तो चुनाव में विकास का मुद्दा था ही नहीं | विकास पिछले कुछ वर्षो में ही एक मुद्दा बना है भारतीय चुनावो में | स्वतंत्रता के पश्चात् जिस राजनैतिक पार्टी का शाशन रहा है उसने कभी विकास के बारे में तब तक नहीं सोचा की जब तक शासन में उसका कोई प्रतिद्वंदी नहीं आ गया | जब वह पार्टी सत्ता से दूर हुई तो विकास की बात कर रही है | अब चुनावो में घोषणा पत्रों का अवलोकन करे तो यही प्रतीत होता है की सभी पार्टिया विकास करना चाहिती है  लेकिन  प्रत्येक पार्टी के विकास के मापदंड अलग अलग है | और मानव स्वाभाव भी यही है की प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता अलग अलग  हो सकती और इसी के साथ ही  प्रत्येक व्यक्ति के लिए विकास का मापदंड भी अलग अलग ही होगा |

वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो विकास की संरचना में तीन तरह के देश है 
विकसित , विकासशील और अविकसित अब प्रश्न ये है की जब प्रत्येक व्यक्ति के विकास का मापदंड अलग है तो किसी देश अथवा व्यक्ति को विकसित , विकासशील और अविकसित की श्रेणी में रखने  की अवधारणा कैसे निश्चित  की जा सकती है | और अगर सभी से पूछा भी जाये की विकास का मापदंड क्या होना चाहिए तो जवाब अलग अलग ही आयेगा |

नटवर दान गाडण 


गुरुवार, 24 नवंबर 2016

नोटबंदी

दिया सन्देश जनता को जो ऐसा काम कर जाए
करप्शन और आतंक का यही अंजाम हो जाए
करके प्रतिबन्ध नोटों पर है मारा तीर एक ऐसा
एक तीर से सब दुश्मनों का काम हो जाये | 1

था जिसके पास काला धन वो सब नाकाम कर डाला
दबा कर  था जो  रखा  धन  उसे  नीलम  कर  डाला
हुई तकलीफ जिनको इस खबर से जान लो तुम भी
सदन के सामने जिसने तो अब कोहराम कर डाला  | 2

बुधवार, 6 जनवरी 2016

जीत के प्रति प्रीत



हार के उस पार का संसार मेरा
जीत के प्रति प्रीत सा व्यवहार मेरा
दो अगर तुम संगिनी बन साथ मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा  
हो कभी जब मेरे मन का दृश्य खाली
लौ जला कर मन में करदे तू दिवाली
अपने सपनो को तू दे आकार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा  
मेरे मन के द्वार को तुम आज खोलो
मन को मेरे भी आज तुम टटोलो
कर दो अपने कंठ से उदगार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा  
होता होगा तेरे मन में भी उजाला
जलती होगी तेरे भी मन प्रेम ज्वाला
कर दो मन के तम का तुम उपचार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा   
स्वप्न तेरे देखता हूँ इन नयन में
चाहता हूँ तुमको पाना इस भू गगन में
स्वप्न अब तू आज कर साकार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा   
मैं तो तुमको अपनी संगी मानता हूँ
भाग्य के अनुबंध को मैं जनता हूँ
सौंप दो अब अपना मन आदिकार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा   
 देखते हो अब वो सपने तुम नयन में
है छुपी एक तृष्णा इस भोले पन में
नयनो का ये भोलापन आधार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा   
क्यों तुम्हारे मन का कौन रिक्त सा ये
क्यों रगों का रक्त है विरक्त सा ये
अपने मन में करदो तुम संचार मेरा
जीत के प्रति प्रीत का संसार मेरा   


पहली कविता



तुमने जो थे गीत सुनाये
रात हमारे स्वप्न में आये
पाया हमने जैसा भी हो क्षण भर का सम्मान
गाओ पुनः पुराना गान १
है व्याकुल सुन गान तुम्हारे
सुन ण सके जो कान हमारे
एक बार फिर सहज रूप से करदो तुम आसान
गाओ पुनः पुराना गान २
जो मैंने तब नहीं सुने थेजो
जो जो हमने स्वप्न बुने थे
उन सपनो का अपने मन से मत करना अवसान
गाओ पुनः पुराना गान ३
गाओ फिर तुम वही तराना
जो रह गया था शेष सुनना
ना बाधा ना कोई रुकावट ना कोई व्यवधान
गाओ पुनः पुराना गान ४
ज्ञात है हमको आ ना सकोगे
हमको तुम फिर पा ना सकोगे
किन्तु फिर भी करदो पुरे एक बार अरमान
गाओ पुनः पुराना गान 
जीवन की बस एक ही आशा
तुमको पाने की अभिलाषा
एक बार फिर हो जाये हम दोनों ही नादान
गाओ पुनः पुराना गान 
जैसा हमने तुमको पा कर
तुमको अपने पास बुला कर
करना चाहू एक बार फिर वैसा ही अभिमान
गाओ पुनः पुराना गान 
छोटी सी प्रेम कथा से
मेरी तुम इस विरह व्यथा से
मन में धर लो एक बार टो मत न बनो अंजान
गाओ पुनः पुराना गान ८
मेरा जीवन तुम्हे समर्पित
पल पल मेरा तुमको अर्पित
ऐसे ही कुछ शब्दों का तुम फिर से करो बखान
गाओ पुनः पुराना गान